
आज भी बहुत से लोग सनस्क्रीन को केवल गर्मियों में या घूमने-फिरने के समय लगाने वाली चीज़ मानते हैं। कई लोगों को यह भी लगता है कि अगर वे ज़्यादातर घर के अंदर रहते हैं तो सनस्क्रीन की कोई ज़रूरत नहीं होती। यह सोच पूरी तरह गलत है।
सनस्क्रीन कोई सौंदर्य प्रसाधन नहीं है, बल्कि त्वचा की सुरक्षा का एक अनिवार्य उपाय है। यदि आप रोज़ सनस्क्रीन का उपयोग नहीं करते, तो समय के साथ आपकी त्वचा को नुकसान पहुँचना तय है। यह नुकसान पहले दिखाई नहीं देता, लेकिन बाद में दाग-धब्बों, झुर्रियों और पिगमेंटेशन के रूप में सामने आता है।
इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे:
- सनस्क्रीन क्या होता है
- SPF का अर्थ क्या है
- रोज़ सनस्क्रीन लगाना क्यों ज़रूरी है
- सनस्क्रीन लगाने का सही तरीका
- और आम गलतियाँ जो लोग करते हैं
सनस्क्रीन क्या होता है?
सनस्क्रीन एक ऐसा लेप होता है जो त्वचा को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाता है। सूर्य से निकलने वाली ये किरणें त्वचा की गहराई तक प्रवेश करके धीरे-धीरे नुकसान करती रहती हैं।
सूर्य की किरणें मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं:
- UVA किरणें – त्वचा की उम्र बढ़ाने, झुर्रियाँ और पिगमेंटेशन पैदा करने का कारण बनती हैं
- UVB किरणें – त्वचा के जलने, लालिमा और सनबर्न का कारण बनती हैं
सनस्क्रीन इन दोनों प्रकार की किरणों से त्वचा की रक्षा करता है।
SPF क्या होता है?
SPF का पूरा नाम सन प्रोटेक्शन फ़ैक्टर होता है।
SPF यह बताता है कि सनस्क्रीन UVB किरणों से कितनी सुरक्षा देता है।
SPF संख्या का अर्थ
- SPF 15 – लगभग 93% सुरक्षा
- SPF 30 – लगभग 97% सुरक्षा
- SPF 50 – लगभग 98% सुरक्षा
यह समझना बहुत ज़रूरी है कि:
कोई भी सनस्क्रीन 100% सुरक्षा नहीं देता।
इसलिए केवल अधिक SPF देखकर लापरवाह नहीं होना चाहिए।
SPF 30 और SPF 50 में क्या अंतर है?
यदि आप सामान्य दिनचर्या में ज़्यादा समय धूप में नहीं रहते हैं, तो:
-
SPF 30 पर्याप्त होता है
लेकिन यदि:
- आपकी त्वचा पर पिगमेंटेशन है
- मेलाज़्मा या काले दाग हैं
- आप ज़्यादा समय बाहर रहते हैं
तो:
-
SPF 50 अधिक उपयुक्त होता है
हालाँकि SPF से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण बातें हैं:
- सही मात्रा में लगाना
- समय-समय पर दोबारा लगाना
- रोज़ाना नियमित उपयोग
रोज़ सनस्क्रीन लगाना क्यों ज़रूरी है?
यदि आप रोज़ सनस्क्रीन नहीं लगाते:
- पिगमेंटेशन ठीक नहीं होती
- दाग-धब्बे गहरे हो जाते हैं
- त्वचा समय से पहले बूढ़ी दिखने लगती है
- त्वचा की प्राकृतिक चमक कम हो जाती है
सूर्य का नुकसान धीरे-धीरे होता है
सूर्य से होने वाला नुकसान एक दिन में दिखाई नहीं देता। यह वर्षों तक जमा होता रहता है और बाद में:
- असमान त्वचा रंग
- झुर्रियाँ
- मेलाज़्मा
- रूखी और बेजान त्वचा
के रूप में दिखाई देता है।
इसलिए सनस्क्रीन इलाज नहीं, बल्कि बचाव है।
क्या केवल गर्मियों में सनस्क्रीन लगाना चाहिए?
नहीं।
सूर्य की किरणें:
- सर्दियों में भी होती हैं
- बरसात में भी असर करती हैं
- बादल होने पर भी त्वचा को नुकसान पहुँचाती हैं
- घर के अंदर खिड़की के पास भी प्रभाव डालती हैं
काँच UVB किरणों को कुछ हद तक रोकता है, लेकिन UVA किरणें काँच के आर-पार चली जाती हैं।
सनस्क्रीन लगाने का सही तरीका
सनस्क्रीन कब लगाएँ?
सनस्क्रीन हमेशा:
- चेहरे की सफ़ाई के बाद
- मॉइस्चराइज़र के बाद
- और मेकअप से पहले लगाना चाहिए
सही क्रम:
- फेस वॉश
- सीरम (यदि उपयोग करते हैं)
- मॉइस्चराइज़र
- सनस्क्रीन
सनस्क्रीन को किसी अन्य उत्पाद में मिलाकर नहीं लगाना चाहिए।
कितनी मात्रा में सनस्क्रीन लगानी चाहिए?
चेहरे और गर्दन के लिए:
-
दो उँगली जितनी मात्रा
या - लगभग एक चौथाई चम्मच
कम मात्रा में लगाया गया सनस्क्रीन पूरी सुरक्षा नहीं देता।
सनस्क्रीन दोबारा कब लगाएँ?
- हर 2 से 3 घंटे में
- ज़्यादा पसीना आने पर
- चेहरा पोंछने के बाद
आम गलतियाँ जो लोग करते हैं
- केवल बाहर जाते समय सनस्क्रीन लगाना
- दोबारा न लगाना
- बहुत कम मात्रा लगाना
- केवल मेकअप के SPF पर भरोसा करना
- यह सोचना कि गहरी त्वचा को सनस्क्रीन की ज़रूरत नहीं
हर प्रकार की त्वचा को सनस्क्रीन की आवश्यकता होती है।
प्रश्न-उत्तर (FAQs)
प्रश्न 1: क्या घर के अंदर सनस्क्रीन लगाना ज़रूरी है?
उत्तर: हाँ, यदि प्राकृतिक रोशनी आती है।
प्रश्न 2: क्या SPF 50 रोज़ लगाया जा सकता है?
उत्तर: हाँ, यह सुरक्षित है।
प्रश्न 3: क्या सनस्क्रीन से दाने हो सकते हैं?
उत्तर: गलत प्रकार के सनस्क्रीन से हो सकते हैं।
प्रश्न 4: क्या रात में सनस्क्रीन लगाना चाहिए?
उत्तर: नहीं।
Conclusion
सनस्क्रीन सुंदर दिखने के लिए नहीं, त्वचा की रक्षा के लिए है।
यदि आप अपनी त्वचा को लंबे समय तक स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो सनस्क्रीन का रोज़ाना उपयोग अनिवार्य है।

